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लालकिले से गूंजा ‘वंदे मातरम्’, पीएम मोदी ने फहराया तिरंगा

80वें स्वतंत्रता दिवस पर दिखी देशभक्ति की भव्य झलक

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को देशभक्ति के उत्साह और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच लालकिला परिसर में 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह का नेतृत्व किया। इस बार समारोह में पहली बार लालकिले पर राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ की प्रस्तुति हुई। सेना के बैंड ने ‘वंदे मातरम्’ की धुन बजाकर समारोह की शुरुआत को विशेष बना दिया।

इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और राष्ट्रगान हुआ। राष्ट्रगान की प्रस्तुति के साथ 1721 फील्ड बैटरी (सेरेमोनियल) के गनरों ने स्वदेशी 105 मिमी लाइट फील्ड गन से 21 तोपों की सलामी दी। लालकिले की प्राचीर को फूलों से सजाया गया था। सजावट के केंद्र में राष्ट्रीय ध्वज को प्रदर्शित किया गया, जिसके चारों ओर हिंदी में ‘वंदे मातरम्’ लिखा गया था।

ध्वजारोहण के बाद तिरंगे को ‘राष्ट्रीय सलामी’ दी गई। इसके बाद भारतीय वायुसेना के दो एमआई-17 हेलीकॉप्टरों ने समारोह स्थल पर फूलों की पंखुड़ियों की वर्षा की। एक हेलीकॉप्टर पर राष्ट्रीय ध्वज, जबकि दूसरे पर ‘वंदे मातरम्’ को दर्शाने वाला झंडा लगा था।

लालकिले पर प्रधानमंत्री मोदी की अगवानी के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह मौजूद रहे। दिल्ली क्षेत्र के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल राजेश सेठी प्रधानमंत्री को सलामी स्थल तक लेकर पहुंचे। इसके बाद प्रधानमंत्री ने गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर करीब 75 मिनट तक देश को संबोधित किया। इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, किरेन रीजीजू, किंजारपु राम मोहन नायडू, भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला समेत कई केंद्रीय मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और सैन्य अधिकारी मौजूद रहे। हालांकि, लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे लगातार दूसरे वर्ष स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल नहीं हुए। इस वर्ष समारोह के आयोजन में भारतीय सेना समन्वय सेवा रही।

प्रधानमंत्री के संबोधन के समापन के बाद बड़ी संख्या में राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के कैडेटों और ‘माय भारत’ स्वयंसेवकों ने ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन किया। इसके बाद राष्ट्रगान हुआ। लालकिले के सामने ज्ञानपथ पर ‘वंदे मातरम्’ शब्द अंकित किया गया था। यहां एनसीसी कैडेट और ‘माय भारत’ के स्वयंसेवक मौजूद रहे। ज्ञानपथ पर ‘विकसित भारत @2047’ की थीम को दर्शाती आकृतियां भी लगाई गई थीं।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस वर्ष का समारोह ‘वंदे मातरम्’ की स्थायी विरासत के 150 वर्ष पूरे होने और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में युवा शक्ति की भूमिका को समर्पित रहा। लालकिले पर आयोजित समारोह के निमंत्रण कार्ड में नवनिर्मित सेवा तीर्थ परिसर को प्रमुखता से दर्शाया गया। इस परिसर में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय स्थित हैं। निमंत्रण कार्ड पर ‘धर्म चक्र’ भी प्रदर्शित किया गया, जिसे धार्मिक कर्तव्य और निरंतर नि:स्वार्थ कार्य के प्रतीक के रूप में दर्शाया गया।

समारोह में अतिथियों के बैठने के स्थानों का नाम देश की प्रमुख झीलों के नाम पर रखा गया था। इनमें बड़खल, भीमताल, चंद्रताल, चिलिका, दलपत सागर, डिमना, दूधसागर, हाफलोंग, हरिके, हुसैन सागर, कंवर, कांकरिया, पैंगोंग सो, पुलिकट, पुष्कर और रवींद्र सरोवर शामिल रहे।

समारोह के समापन पर प्रधानमंत्री मोदी सुरक्षा घेरे से बाहर निकलकर युवा प्रशंसकों के बीच पहुंचे। उन्होंने एनसीसी कैडेटों और ‘माय भारत’ स्वयंसेवकों से बातचीत की। भाजपा ने अपने ‘एक्स’ हैंडल पर इन मुलाकातों के दृश्य साझा करते हुए कहा कि ‘जेन अल्फा और प्रधानमंत्री मोदी के बीच एक अलग ही रिश्ता है।’

लालकिले पर स्वतंत्रता दिवस समारोह में देश के विभिन्न क्षेत्रों से करीब 5,000 विशेष अतिथियों को आमंत्रित किया गया था। इनमें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के स्वयंसेवक, पीएम मुद्रा योजना के तहत महिला उद्यमी, उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले ‘माय भारत’ स्वयंसेवक, पीएमएवाई (यू) के लाभार्थी और पीएम स्वनिधि योजना से जुड़े रेहड़ी-पटरी वाले शामिल रहे। इसके अलावा विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से पारंपरिक भारतीय परिधान में बड़ी संख्या में लोगों को भी समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया था।

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